कोटा राजस्थान का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और यह शहर, चंबल नदी के तट पर स्थित है, कोटा में स्थित त्रिकुटा मंदिर प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। इन सभी के अलावा यह शहर अपनी विशेष शैली के चित्रों, महलों, संग्रहालयों और पूजा स्थलों के लिए जाना जाता है। सोने के आभूषण, डोरिया साड़ी, रेशम की साड़ियाँ, और कोटा पत्थर के लिए लोकप्रिय हैं।

कोटा का इतिहास लगभग 12वीं शताब्दी में शुरू होता है, जब राव देव ने इस क्षेत्र पर आक्रमण किया और हाड़ौती का निर्माण किया। बूंदी को 1631 में स्वायत्त राजपूत राज्य कोटा में विभाजित किया गया था। कोटा का एक अलग ही इतिहास रहा है क्योंकि इस पर लगातार मुगल सम्राटों, जयपुर के महाराजाओं और यहां तक ​​कि मराठा आक्रमणकारियों ने आक्रमण किया था। कोटा शहर अपने स्थापत्य वैभव के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, जिसमें अति सुंदर महल, मंदिर और संग्रहालय शामिल हैं जो एक बीते युग की भव्यता को दर्शाते हैं। इस लेख में हम मानव निर्मित प्राकृतिक और धार्मिक सुन्दरता का संगम का निर्माण करने वाले त्रिकुटा मंदिर के बारे में जानेगें।

माँ त्रिकुटा मंदिर: राजस्थान के कोटा में स्थित में त्रिकुटा मंदिर के बारे में जानकारी

माँ त्रिकुटा मंदिर

मां त्रिकुटा मंदिर कोटा शहर के केंद्र से कोटा बूंदी रोड पर लगभग 10 किलोमीटर दूर है। इस मंदिर का निर्माण लगभग 12 साल में पूरा हुआ है और बनाने में जितना समय लगा वह इसकी सुंदरता को देखकर ही पता चलता है। प्राकृतिक सुन्दरता के साथ विशाल मंदिर माँ त्रिकुटा का निर्माण किया गया है जो पुरे भारतीय एवं कोटा के लोगों के लिए आकर्षक का केंद्र हैं त्रिकुटा मंदिर को पूरा पत्थरों से सजाकर ऐसे बनाया गया है मानों ये कोई प्रकृति की देन है।

वहाँ के मुख्य गर्भगृह में मां वैष्णो देवी की मूर्ति है वह कटरा में श्री माता वैष्णो देवी की मूल मूर्ति के समान है। प्रवेश द्वार जिसके दोनों ओर दो विशाल शेर और हाथी हैं, मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगा देता है। यह मंदिर मां वैष्णो देवी के मूल पथ के समान पहाड़ियों और गुफाओं के आकार में बना है। मंदिर के मैदान के बीच में भगवान शिव की विशाल मूर्ति प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। प्राकृतिक दिखने वाली गुफाएं, झरने, पेड़, जानवर, पत्थर की नक्काशी, और भगवान हनुमान और देवी पार्वती जैसे हिंदू देवी-देवताओं की विभिन्न मूर्तियाँ मंदिर के अन्य आकर्षणों में से एक हैं।

वहाँ एक चरण पादुका मंदिर भी है। इस मंदिर के शिल्पकारों ने इसे सबसे प्राकृतिक रूप देने की पूरी कोशिश की। यदि आप कोटा की यात्रा कर रहे हैं, तो यह आपके और आपके मित्रों और परिवार के लिए देखने योग्य स्थान है। तो प्राकृतिक सुन्दरता के समान दिखने वाला इस भव्य मंदिर को देखने जरुर जायें।

नियम और निर्देश

  1. मंदिर के अंदर कैमरा, सेल फोन, चमड़े की बेल्ट, जूते और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की अनुमति नहीं है। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की अनुमति नहीं है।
  2. वहाँ कटरा नामक एक फूड कोर्ट है जहाँ आप मंदिर जाते समय कुछ भोजन प्राप्त कर सकते हैं। मंदिर में या इस फूड कोर्ट में प्रवेश करने से पहले आप अपने फोन का उपयोग कर सकते हैं।
  3. यदि आपने शराब या सिगरेट जैसे किसी नशीले पदार्थ का सेवन किया है तो आपको परिसर में प्रवेश नहीं करना चाहिए। इस नवनिर्मित प्राकृतिक आश्चर्य को यथासंभव स्वच्छ रखना हमारी जिम्मेदारी है।

माँ त्रिकुटा मंदिर खुलने का समय

सप्ताह के सातों दिन, मंदिर सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है। मंदिर के मैदान का पूरी तरह से भ्रमण करने के लिए आपको 1 से 2 घंटे का समय चाहिए, इसलिए अपने दिन की योजना बनाएं।

टिकट की कीमतें और अतिरिक्त शुल्क

एक टिकट की कीमत 50 रुपये है। यह कीमत भविष्य में बढ़ सकती है क्योंकि यह स्थान राजस्थान और पड़ोसी राज्यों के निवासियों के लिए एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है। दोपहिया वाहनों से 10 रुपये पार्किंग शुल्क लिया जाता है, जबकि चार पहिया वाहनों से 30 रुपये वसूल किए जाते हैं।

माँ त्रिकुटा मंदिर का फोटो


माँ त्रिकुटा मंदिर कब और कैसे जाएँ

आप इस मंदिर में देवी देवताओं के दर्शन करने कभी भी जा सकते हैं, मां त्रिकुटा मंदिर पहुँचाना बहुत ही आसन है यह कोटा शहर के केंद्र से कोटा बूंदी रोड पर लगभग 10 किलोमीटर दूर है। निजी वाहन वहां पहुंचने के लिए सबसे अच्छा विकल्प हैं क्योंकि वे सबसे सुविधाजनक हैं। राजस्थान सरकार की बसें और ऑटोरिक्शा भी उपलब्ध हैं।

  • निकटतम बस स्टैंड :- नयापुरा बस स्टैंड निकटतम बस स्टॉप है, जो लगभग 4 से 5 किलोमीटर दूर है।
  • निकटतम रेलवे स्टेशन:- कोटा रेलवे स्टेशन से लगभग 10 किलोमीटर दूर है।
  • निकटतम हवाई अड्डा:- जयपुर में है, जो लगभग 240 किलोमीटर दूर है।

इन्हें भी देखें

सवाल जवाब

माँ त्रिकुटा मंदिर कहाँ है?

माँ त्रिकुटा मंदिर राजस्थान के कोटा में है।

त्रिकुटा धाम कोटा में किसका मंदिर है?

माँ वैष्णो देवी माता मंदिर, भैरों मंदिर,और अन्य मंदिर हैं।

मंदिर खुलने का समय क्या है?

सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है