तीरथगढ़ जलप्रपात: छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सुंदरता से भरा हुआ है, यहाँ कई शानदार झरने, नदियाँ, पहाड़ हैं, जो राज्य को बाकि सबसे अलग बनाती है। आपने जादूगर व्यक्ति के बारे में सुना है लेकिन क्या जलप्रपात का नाम जादूगर सुना है नहीं ना तो इस लेख में हम ‘कांगेर घाटी का जादूगर’ कहे जाने वाला जलप्रपात के बारे में जानेंगे जो चारों ओर से हरे-भरे जंगलों से घिरा है जिसकी सुन्दरता पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। यदि आप प्रकृति का आनंद लेते हैं, या लेना चाहते है तो आपको अवश्य जाना चाहिए;

तीरथगढ़ जलप्रपात के बारे में जानकारी

तीरथगढ़ जलप्रपात

तीरथगढ़ जलप्रपात, जिसे “कांगेर घाटी का जादूगर” भी कहा जाता है, यह जलप्रपात छत्तीसगढ़ के सबसे खूबसूरत जलप्रपातों में से एक है। झरना सुंदर पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जिसका दृश्य शानदार है। जो हरे भरे जंगल से झरनें को घेर हुए हैं और झरना की शोभा बढ़ाते हैं। कई धाराओं से, कई रास्तों से बहता हुआ पानी, और अंत में झरनों में गिरते हुए नजारा देखने लायक होता है।

यह आश्चर्यजनक जलप्रपात कांगड़ और उसकी सहायक नदियों, ‘मुंगा’ और ‘बहार’ दो नदियों से मिलकर बह रहा है। सुन्दर जलप्रपात के अलावा, भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक धार्मिक मंदिर भी है, जो दुनिया भर से सैकड़ों स्थानीय लोगों और आगंतुकों को आकर्षित करते हैं और यह एक धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है। राज्य और भारत के अन्य हिस्सों से हजारों आगंतुक और भक्त मंदिर में प्रार्थना करने जाते हैं।

तीरथगढ़ जलप्रपात छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में जगदलपुर से लगभग 38 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह छत्तीसगढ़ का सबसे ऊंचा जलप्रपात है, जो लगभग 300 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। नदी के नीचे की ओर की चट्टानें हजारों साल पहले भूकंप के साथ एक चंद्र क्रेटर द्वारा नीचे गिरा दी गई थीं, और इसके द्वारा निर्मित सीढ़ी नुमा घाटी ने इस मनोरम झरना का निर्माण किया।

यह झरना प्राकृतिक पहाड़ी संरचनाओं से मिलती-जुलती सीढ़ियों के ऊपर से बहता है, जिससे पानी दूधिया दिखाई देता है। झरने के पास खड़े पर्यटकों को पानी की छोटी-छोटी फुहार जैसी बूंदों को महसूस करना अच्छा लगता है। जिससे उनका मन शांति से भर जाता है। यह झरना पर्यटकों को अपनी सुंदरता से पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर देता है। पानी के दूधिया रंग के कारण इसे स्थानीय बोली में ‘दूधिया झरना’ के नाम से भी जाना जाता है।

तीरथगढ़ जलप्रपात कब और कैसे जाये

तीरथगढ़ जलप्रपात वैसे तो आप कभी भी जा सकते हैं लेकिन सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी के बीच में, मानसून के बाद का होता है, झरने के आस-पास का जंगल और भी हर भरा हो जाता है और हरी-भरी जंगल में चहचहाती पक्षी की आवाज के साथ झरने का सुन्दर नजारा को देखने का अंदाज ही अलग होता है। जाने की बात करें तो जगदलपुर तक आप आसानी से अपने साधन या बस के माध्यम से पहुंच सकते है।

  • सडक मार्ग – जगदलपुर कई बड़े शहरो से जुड़ा हुआ है आप तीरथगढ़ वॉटरफॉल बस या अन्य वाहनों की मदद से आसानी से पहुंच सकते हैं।
  • निकटतम रेलवे स्टेशन – जगदलपुर रेलवे स्टेशन।
  • निकटतम हवाई अड्डा – स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा रायपुर।

तीरथगढ़ जलप्रपात के समीप अन्य पर्यटन स्थल

तीरथगढ़ जलप्रपात के आस-पास और भी अन्य पर्यटन स्थल है यदि आप वहाँ घूमने जा रहे है तो नीचे बताये गये स्थलों का भ्रमण करना न भूलें

कुटुमसर गुफाएं:- कुटुमसर में गुफाओं का एक समूह है, जो भारत की सबसे लंबी प्राकृतिक गुफाओं में से एक है, जो लगभग 330 मीटर लंबी, 40 मीटर गहरी है यह जगदलपुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित है। वर्ष 1900 के आसपास आदिवासियों द्वारा खोजा गया था लेकिन यह वर्ष 1951 में पहली बार इस गुफा की औपचारिक रूप से जांच की गई।

गुफा हमेशा अंधेरा रहता है इस नम गुफा में सूरज की रोशनी की एक भी किरण नहीं पहुँचती है इस गुफा में अंधी मछली का भी घर है। गुफा में पांच विशाल प्राकृतिक कक्ष हैं जिनमें सुंदर स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट संरचनाएं हैं जो प्रकृति द्वारा प्रति 6000 वर्षों में एक इंच की हिमनद गति से उकेरी गई हैं!

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान:- कांगेर घाटी देश के सबसे घने जंगलों में से एक है कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान का नाम कांगेर नदी के नाम पर पड़ा है, जो इससे होकर गुजरती है। कांगेर घाटी लगभग 200 वर्ग किलोमीटर में फैली है। 1982 में, कांगेर घाटी को राष्ट्रीय उद्यान के रूप में नामित किया गया था। मानसून के बाद जंगल हरा-भरा हो जाता है यह ऊंचे पहाड़ों, गहरी घाटियों, विशाल वृक्षों और मौसमी जंगली फूलों और जीवों की विविधता वाला एक सुंदर क्षेत्र है।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में साल, सागौन, सागौन और बांस के पेड़ों के साथ मिश्रित जंगल का एक खुबसूरत नजारा है। मैना बस्तर का सबसे लोकप्रिय पक्षी है और इसकी मानवीय आवाज सभी को मंत्रमुग्ध कर देती है। जो मानव आवाज की नकल कर सकती है। जंगल में प्रवासी और निवासी दोनों तरह के पक्षी देखे जा सकते हैं।

चित्रकूट जलप्रपात :- चित्रकूट जलप्रपात यह जगदलपुर शहर से लगभग 38 किलोमीटर पश्चिम में है, इंद्रावती नदी छत्तीसगढ़ में घने जंगलो, मैदान से बहती हुए आगे बढ़ रहा है यह पानी अचानक लगभग 93 फीट से नीचे गिरते हुए सुन्दर झरना का निर्माण करता है जिसे चित्रकूट जलप्रपात के नाम के जाना जाता है।

इसे “भारत का नियाग्रा” भी कहा जाता हैं क्योंकि यह भारत का सबसे बड़ा जलप्रपात है, गर्मियों के दौरान, चित्रकूट जलप्रपात अपने सबसे संकरे स्थान पर होता है, लेकिन मानसून के दौरान, जब इंद्रावती नदी अपने उच्चतम स्तर पर होती है, तो जलप्रपात लगभग 150 मीटर चौड़ा होता है।

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सवाल जवाब

तीरथगढ़ जलप्रपात किस नदी से बनती है?

कांगेर नदी की सहायक नदी मुनगा और बहार नदी से मिलकर खूबसूरत झरने का निर्माण करती है।

छत्तीसगढ़ का सबसे ऊंचा जलप्रपात कौन सा है?

छत्तीसगढ़ का सबसे ऊँचा जलप्रपात तीरथगढ़ को माना जाता है। लेकिन हाल ही में जशपुर में महान नदी पर स्थित लगभग 450 फीट ऊंचा मकरभंजा जलप्रपात छ .ग. का सबसे ऊंचे वाटरफॉल के रूप में सामने आया है।

तीरथगढ़ जलप्रपात के आसपास कौन सा मोबाइल नेटवर्क है?

तीरथगढ़ झरने के आसपास जिओ और एयरटेल के नेटवर्क उपलब्ध है।