टाइगर पॉइंट: मैनपाट एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जिसे “छत्तीसगढ़ का शिमला” कहा जाता है। यह कई तिब्बती धार्मिक निर्वासितों का भी घर है मैनपाट कई सांस्कृतिक और प्राकृतिक आकर्षणों के साथ जंगल के पठार के ऊपर बसा एक प्यारा, सुंदर शहर है। मैनपाट की घाटी और पहाड़ियाँ आश्चर्यजनक जलप्रपात प्रदान करती हैं, जैसे कि टाइगर पॉइंट, जहाँ पहले बाघ दिखते थे और फिश पॉइंट, यहाँ की नदी एक प्रकार की मछलियों के लिए प्रसिद्ध थी, मेहता पॉइंट, जलजली पॉइंट आदि। टाइगर नाम तो सुने ही होंगें लेकिन जानवर का नाम ही सुना होगा,क्या आपको पता है इस नाम का जलप्रपात भी है नही जानते है न तो चलिए इस लेख के माध्यम से जानते है।

Tiger Point: मैनपाट में स्थित टाइगर पॉइंट के बारे में जाने

टाइगर पॉइंट

टाइगर पॉइंट फॉल्स छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने मैनपाट में स्थित है, यह अंबिकापुर से लगभग 57 किमी की दूरी पर है महादेव मुड़ा नदी इन झरनों का निर्माण करती है। टाइगर पॉइंट मैनपाट के प्रमुख आकर्षण का केंद्र है, टाइगर पॉइंट पर सुन्दर झरना मनोरम दृश्यों के साथ जंगल को एक अनोखा परिदृश्य प्रदान करती है। यहां बंदरों की उछल कूद और कल- कल करता झरना मनमोहक दृश्य के साथ पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। बारिश के सीजन में यह दृश्य और भी मनोरम हो जाता है। यह जगह के चारों ओर हरा-भरा जंगलों से घिरा हुआ है। यह सुंदर जलप्रपात लगभग 60 मीटर की ऊंचाई से नीचे गिरता है। दावा किया जाता है कि कई साल पहले इस स्थान पर वन के बाघ देखा जाता था। नतीजतन, इसे वर्तमान में टाइगर प्वाइंट के रूप में जाना जाता है। फॉल्स तक नीचे जाने के लिए, आपको सीढ़ियों के माध्यम से उतरना पड़ेगा। तभी तो ठंडी हवा के साथ पानी की बुँदे शरीर की त्वचा पर पड़ेगी और मंत्र मुग्ध कर देगी।

मैनपाट कब जाना चाहिए

मैनपाट आप कभी भी जा सकते है लेकिन मानसून और ठंडी में यहाँ की खूबसूरती देखने लायक होता है अगर आप मानसून में जाते है तो सुन्दर झरना का आनन्द ले पाएंगे और ठंडी में झरना के साथ-साथ प्रकृति वादियों का लुप्त उठा सकते है।

मैनपाट में कहाँ ठहरें

मैनपाट हिल या कमलेश्वरपुर जो मध्य में स्थित बौद्ध मंदिर के लिए लोकप्रिय है। आप आसानी से अच्छे होटल प्राप्त कर सकते हैं और इसकी कीमत लगभग 1000-2000 / – प्रति रात है जो पिक और ऑफ सीजन पर निर्भर करती है।

मैनपाट कैसे पहुंचें

सरगुजा जिले में स्थित, मैनपाट छत्तीसगढ़ का एक लोकप्रिय हिल स्टेशन है जिसकी सड़क मार्ग से अच्छी कनेक्टिविटी है। हालांकि, परिवहन के अन्य साधन जैसे उड़ानें और रेलवे सीधे उपलब्ध नहीं हैं।

हवाई अड्डा :- भारत के किसी अन्य प्रमुख शहर से मैनपाट के लिए कोई नियमित उड़ान नहीं है। स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, उर्फ रायपुर हवाई अड्डा, अटल नगर, छत्तीसगढ़ में रामचंडी का मुख्य हवाई अड्डा है जो भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। हवाईअड्डा प्रसिद्ध एयरलाइन सेवाओं जैसे एयर इंडिया, विस्तारा, जेट एयरवेज, इंडिगो से नियमित उड़ानों का आनंद ले सकते है। रायपुर हवाई अड्डा से आप मैनपाट पहुंचने के लिए बस या टैक्सी ले सकते हैं।

रेलवे स्टेशन :- मैनपाट ऊंचाई पर होने के कारण यहाँ कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। सबसे निकटतम में अंबिकापुर रेलवे स्टेशन हैं। यदि आप भारत के किसी अन्य शहर से यात्रा करना चाहते हैं, तो आपको रायपुर रेलवे स्टेशन पर उतरना होगा। यह भारत के दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग :- मैनपाट गांव छत्तीसगढ़ क्षेत्र से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। इस क्षेत्र में कई सरकारी और निजी बस सेवाएं उपलब्ध हैं। आप इनके माध्यम से पहुँच सकते है।

मैनपाट में अन्य पर्यटन स्थल

जलजली पॉइंट :- मैनपाट में घूमने के लिए सबसे दिलचस्प स्थानों में से एक है, यहाँ की जमीन की सतह एक ट्रैम्पोलिन की तरह उछलती है। यदि कोई उछलेंगे तो जमींन हिलती है प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेना चाहते हैं तो यह क्षेत्र, जिसे उछलती हुई भूमि के रूप में भी जाना जाता है, एक बार जरूर जाएँ।

विसरपानी या उल्टा पानी :- यह स्थल सरगुजा जिले में मैनपाट से 5 किलोमीटर की दूरी पर विसरपानी गाँव में स्थित है। यह विसरपानी गाँव में स्थित होने के कारण इसे विसरपानी कहा जाता है यहाँ पानी का बहाव नीचे से ऊपर की ओर होता है इसलिए इसे उल्टा पानी के नाम से भी जाना जाता है।
यह एक गुरुत्वाकर्षण-विरोधी पहाड़ी है जहाँ ऑप्टिकल भ्रम के कारण पानी ऊपर की ओर बहता है। जल के इस प्रवाह को देखने के लिए कई आगंतुक प्रमुख पर्यटन स्थल पर आते हैं।

मछली प्वाइंट :- मैनपाट से लगभग 17 किलोमीटर दूर यह भव्य स्थान, खड़ी पहाड़ी श्रृंखला में स्थित है और मछली पॉइंट पर झरना एक सुंदर दृश्य का निर्माण करता है। लगभग 80 मीटर की ऊंचाई से गिरने वाली नदी में मौजूद मछलियों की कई प्रजातियों के कारण इस स्थल को फिश प्वाइंट के नाम से जाना जाता है।

सवाल जवाब

टाइगर पॉइंट का नाम कैसे पड़ा?

टाइगर पॉइंट पर पहले जंगल के बाघ देखे जाते थे इसलिए इसका नाम टाइगर पॉइंट पड़ा।

अंबिकापुर से टाइगर पॉइंट की दूरी कितनी है?

अंबिकापुर से टाइगर पॉइंट की दूरी लगभग 57 किमी है।

टाइगर पॉइंट कब जाना चाहिए?

टाइगर पॉइंट की खूबसूरती बरसात और ठंडी में चरम पर होती है,तो इस मौसम में जाना ज्यादा अच्छा होगा।