रामगढ़ की पहाड़ी, सरगुजा: छत्तीसगढ़ के सरगुजा में, कई ऐतिहासिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक स्थल हैं। सृष्टि के रचयिता ने इसे एक विशिष्ट प्राकृतिक सौन्दर्य प्रदान किया है। सरगुजा न केवल भारत में बल्कि एशिया में भी अपने ऐतिहासिक महत्व और पुरातात्विक स्थलों के कारण महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। इसके गर्भ में कई ऐतिहासिक स्थल हैं। दक्षिण कौशल लंबे समय से रामायण संस्कृति से जुड़ी हुई हैं। महाकवि कालिदास ने अपनी अनूठी कृति “मेघदूतम” की रचना इसी पहाड़ी में की थी। रामगढ़ पर्वत की निचली चोटियों पर स्थित प्राकृतिक सुन्दरता से संपन्न गुफाएं “सीताबेंगरा” और “जोगीमारा” दुनिया के सबसे पुराने रॉक थिएटर हैं। इन गुफाओं को तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व की मानी जाती है। सीताबेंगरा गुफा में गुप्तकालीन अभिलेख, जोगीमारा की गुफा में मौर्यकालिन ब्राह्मी लिपि का अभिलेख मिले है।

रामगिरी पर्वत जहाँ भगवान राम, माता, सीता लक्ष्मण चौदह वर्षीय वनवास के समय वहाँ बिताये थे और अपनी पहचान छोड़ गये तो इस लेख में हम रामगढ़ की पहाड़ी के बारे में, रामगिरी पर्वत की प्राचीन गुफाए, मंदिर और पुरातात्विक बाते जानेंगे।

सरगुजा के रामगढ़ की पहाड़ी के बारे में जानकारी

रामगढ़ की पहाड़ी

रामगढ़ पहाड़ी संभागीय मुख्यालय अंबिकापुर से लगभग 50 किलोमीटर और उदयपुर से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। दूर से यह पहाड़ी बैठे हुए हाथी जैसा प्रतीत होती है। यह समुद्र तल से लगभग 3,202 फीट की ऊंचाई पर है। रामगढ़ पहाड़ी के ऊर्ध्व भाग में दो अभिलेख हैं। छेनी से पत्थर में उकेरी गई इस लेख की लिपि पाली और कुछ खरोष्ठी से मिलती जुलती है। इसे स्क्रिप्ट विशेषज्ञों द्वारा सर्वसम्मत शिफ्ट स्क्रिप्ट माना गया है। इसमें एक रहस्यमय कमल की आकृति है।

रामगढ़ को मेघदूतम, महाकवि कालिदास की अमरता की रचना माना जाता है। पुरातात्विक दृष्टिकोण से, रामगढ़ अध्ययन का केंद्र बन गया, संस्कृति अकादमी भोपाल ने इस पर विशेष ध्यान दिया। लगभग 10 फीट ऊपर, “कालिदासम” शिलालेख खोजा। उन्होंने बताया की कवि कालिदास ‘मेघदूत’ की रचना यहीं किये थे। पहाड़ी बैठे हाथी के आकार का है, जिसमें उत्तर से दक्षिण की ओर एक पहाड़ी है जो समतल जमीनी स्तर से लगभग 308 मीटर की ऊंचाई तक और पहाड़ी के दक्षिण-पर्वत भाग में लगभग 310 मीटर ऊंची एक सीधी खड़ी चट्टान है।

किंवदंती के अनुसार, रामायण काल के दौरान इस स्थान को ‘दंडकारण्य’ के नाम से जाना जाता था और सीताजी पहाड़ी के ऊपर ‘सीता बेंगरा’ गुफा में रहती थीं। इतिहासकारों का मानना है कि रामगढ़ की पहाड़ियाँ रामायण में संदर्भित ‘चित्रकूट’ हैं। एक अन्य कथा के अनुसार प्रसिद्ध कवि कालिदास ने रामगढ़ में ‘मेघदूतम्’ की रचना की थी।

रामगढ़ पहाड़ी में स्थित मन्दिर

रामगढ़ पहाड़ी में देखने के लिए कई जगह है साथ ही वहाँ के मंदिर में पूजा भी किया जाता है। चलिए जानते हैं सभी मंदिर के बारे में जानते हैं:

राम जानकी मंदिर: रामगिरी पहाड़ी के ऊपर हरे-भरे जंगलों के बीच में राम जानकी मंदिर स्थित है, राम जानकी मंदिर तक पहुचंने के लिए लगभग 631 सीढ़ियों को चढ़ कर जाना होगा। राम मंदिर में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की मूर्तियाँ है। मूर्ति के बारे में बताया जाता है की यह 2000 साल से भी अधिक पुरानी है लोगों की मान्यता है की वहाँ जो की भक्त जाते है उनकी मनोकामनाए पूर्ण होती है।

दुर्गा गुफा: दुर्गा गुफा भी पहाड़ी के ऊपर है गुफा के अंदर दुर्गा मंदिर, शिवलिंग है और राम, सीता, लक्ष्मण और भी बहुत सारे भगवान का फोटो भी लगा है। दुर्गा गुफा के पास से हरे-भरे जंगल का दृश्य देखने लायक होता है वहाँ से आप उदयपुर, अंबिकापुर शहर भी देख सकते है अगर आप वहाँ जाते है तो कुछ देरी खड़े होकर आप-पास का दृश्य देखें और प्राकृतिक का लुप्त उठाये।

चन्दन गुफा: यह दुर्गा गुफा से कुछ ही दुरी पर चन्दन गुफा है गुफा के बाहर दो कुंड है जिसमें का पानी कभी नहीं सूखता है और गुफा के अंदर में एक चेम्बर है जहाँ चन्दन पाया जाता है वहाँ के पुजारी अंदर जाते है चन्दन निकालते है। गुफा के अंदर चन्दन होने के कारण पूरा गुफा सुगन्धित रहता है गुफा के अंदर प्राचीन शिवलिंग भी है।

रामगढ़ पहाड़ी के नीचे की गुफाए

सीता बेंगरा

सीता बेंगरा, या सीता के रसोई घर के रूप में इस गुफा को जाना जाता है, यह पहाड़ी का सबसे दिलचस्प पौराणिक प्राचीन गुफा है।”सीताबेंगरा”की उल्लेखनीय कलात्मक गुफाएं रामगढ़ पर्वत के निचले शिखर पर स्थित हैं। कहा जाता है की भगवान राम ने अपने वनवास का कुछ समय रामगढ़ में बिताया था उसी दौरान सीताजी ने जिस गुफा में शरण ली थी, वह “सीताबेंगरा” के नाम से जानी जाने लगी। ये गुफाएं कला प्रेमियों के लिए एक लोकप्रिय तीर्थस्थल हैं। सीता बेंगरा गुफा की समतल चट्टान पर दो पंक्तियों में गुप्तकालीन शिलालेख है, जिसे ब्राह्मी लिपि में लिखी गई है इसे आज तक नहीं समझा गया है इसके बारे में भारतीय पुरातत्व विभाग शोध कर रहा है।

इस गुफा की लंबाई लगभग 14 मीटर और चौड़ाई 4.2 मीटर है। ऊंचाई आगे 2 मीटर और पीछे 1 मीटर है। गुफा के दीवार में सीता जी का अन्न कोठी है गुफा के बाहर कई गोलाकार सीढ़ियाँ और रॉक-कट पोज़ हैं और गुफा के दाहिने छोर पर मानव पैरों के निशान बने हुए हैं। सीता बेंगरा के बाहर लाइन काटा गया है जिसे लोगों द्वारा लक्ष्मण रेखा कहा जाता है।

सीता बेंगरा की संरचना के कारण, यह ज्ञात होता है, तथा लोगों का मानना है कि इसे एक बार एक थिएटर के रूप में उपयोग किया गया था। पूरी बात काफी कलात्मक है। गुफा के बाहर लगभग 50-60 लोगों के लिए अर्धचंद्राकार आसन है। गुफा के प्रवेश द्वार को फर्श में दो छेदों से चिह्नित किया गया है। हर साल आषाढ़ के पहले दिन, इस थिएटर में विविध सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती थी, जिनका उपयोग पर्दे में इस्तेमाल होने वाले लकड़ी के खंभों को फंसाने के लिए किया जाता था। इस गुफा को एशिया की अति प्राचीनतम नाट्यशाला माना जाता है।

जोगीमगारा गुफा

जोगीमारा गुफा, जो सीताबेंगरा के पास स्थित है, इस गुफा की लंबाई 15 फीट, चौड़ाई 12 फीट और ऊंचाई 9 फीट है। इसकी दीवारों के अंदर चिकनी वज्र का प्लास्टर किया गया है। गुफा की छत आश्चर्यजनक चमकदार कलाकृति से ढकी हुई है। इन चित्रों में तोरण, अक्षर-फूल, पशु-पक्षी, नर-देव-दानव, योद्धा और हाथी आदि अन्य चीजें हैं। इस गुफा के चारों ओर पेंटिंग के केंद्र में बैठी पांच युवतियों के चित्र है। इस गुफा में ब्राह्मी लिपि की कुछ पंक्तियाँ उकेरी गई हैं।

हाथीपोल

रामगढ़ के उत्तरी छोर के निचले भाग में एक विशाल सुरंग है जो लगभग 39 मीटर लंबी, 17 मीटर ऊंची और मुंह पर समान चौड़ाई की है। इसे हाथीपोल कहा जाता है। इसकी आंतरिक ऊंचाई इतनी है कि एक हाथी आसानी से इसमें से गुजर सकता है। इसे हाथी पोल के नाम से जाना जाता है। पहाड़ से पानी का रिसाव होता है और सुरंग के अंदर एक कुंड में पानी जमा होता है इस कुंड को सीता कुंड के नाम से जानते है। कवि कालिदास द्वारा मेघदूत की पहली पंक्ति में सीता कुंड का वर्णन किया गया है, “यक्षश्रे जनकातन्य स्नान पुण्योदकेशु।” इस कुंड में अविश्वसनीय रूप से शुद्ध और ठंडा पानी होता है। ।

रामगढ़ मेला

रामगढ़ में चैत्र रामनवमी के अवसर पर भव्य एवं विशाल मेला का आयोजन किया जाता है और रामनवमी के अवसर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु राम जानकी मंदिर का दर्शन करने पहुँचते हैं। दर्शन के साथ-साथ मेला का आनंद लेते हैं, पहाड़ियों के नीचे लगा यह मेला बहुत ही जोरदार होता है। यदि आप राम जानकी मंदिर के दर्शन के साथ मेला का आनंद लेना चाहते है तो आपको रामनवमीं में जाना चाहिए।

रामगढ़ कैसे पहुँचें

सड़क मार्ग: रामगढ़ उदयपुर से 3 किलोमीटर और अंबिकापुर से लगभग 50 किलोमीटर दूर अंबिकापुर-बिलासपुर मुख्य सड़क पर स्थित है। अंबिकापुर से उदयपुर के लिए अच्छी बस सेवा है। उदयपुर से पैदल या मोटर वाहन द्वारा रामगढ़ पहुँचा जा सकता है।

निकटतम रेलवे स्टेशन: अंबिकापुर निकटतम रेलवे स्टेशन हैं।

निकटतम हवाई अड्डा: स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा जो लगभग 350 किलोमीटर दूर है।

इन्हें भी देखें

छ. ग में रामगढ़ की पहाड़ी कहां स्थित है?

छ. ग में रामगढ़ की पहाड़ी सरगुजा जिले के उदयपुर से लगभग 3 किलोमीटर दूर रामगढ़ में है।

रामगढ़ की पहाड़ी पर कौन-कौन सी गुफाएं हैं?

सीता बेंगरा,
जोगीमगारा गुफा,
दुर्गा गुफा,
चन्दन गुफा