Kudargarh Temple Surajpur: छत्तीसगढ़ उन राज्य में से एक है जो अपनी सुन्दर धार्मिक स्थलों, पर्यटक स्थलों और विविध प्रकार की सांस्कृतिक परम्पराओं लिए भी जाना जाता है प्राकृतिक सुन्दरता के साथ धार्मिक स्थलों, पर्यटन स्थलों से भरा यह राज्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है राज्य में स्थित बहुत से धार्मिक स्थल है उन्ही में से एक है सूरजपुर जिला में स्थित कुदरगढ़ माता का मंदिर आज हम इस लेख में जानेंगे जाने माने सूरजपुर में स्थित कुदरगढ़ मंदिर के बारे में।

कुदरगढ़ धाम का मुख्य आकर्षण देवी मां बागेश्वरी मंदिर है। यह पवित्र अभ्यारण क्षेत्र के उच्चतम बिंदु पर स्थित है। इसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक है, इसलिए देवी के दर्शन के लिए देश भर से अनुयायी जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि मंदिर के पीठासीन देवता अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं।

कुदरगढ़ मंदिर के बारे में जानकारी

कुदरगढ़ का मंदिर

कुदरगढ़ मंदिर अंबिकापुर से लगभग 82 किलोमीटर की दूरी पर है। मंदिर की पृष्ठभूमि छत्तीसगढ़ में कुदरगढ़ देवी मां बागेश्वरी के श्रद्धेय मंदिर के लिए जाना जाता है, जो एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में ओडगी ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 06 किलोमीटर की दुरी पर है।

देवी बागेश्वरी मंदिर में आशीर्वाद लेने के लिए प्रदेश भर से भक्त वहाँ जाते हैं, कुदरगढ़ी देवी के दर्शन के लिए लगभग 750-800 सीढ़िया चढ़ना पड़ता है जिसके बाद माँ कुदरगढ़ी के दर्शन कर सकते है पेड़ पौधे की हरियाली और कलकल करती झरने, बंदरो की उझल कूद सीढ़िया चढ़ने में प्रोत्साहित करती हैं ऐसा माना जाता है कि मंदिर के प्रमुख देवता अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। बागेश्वरी देवी मंदिर देवी कुदरगढ़ी को समर्पित है स्थानीय देवता अपनी वासनापूर्ण मांगों के लिए जाने जाते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त देवी को बकरे का दान करते हैं।

कुदरगढ़ मंदिर का इतिहास

मंदिर वास्तुकला और इतिहास बागेश्वरी का प्रसिद्ध मंदिर पौराणिक कथाओं के अनुसार बालंद वंश के राजाओं द्वारा बनाया गया था। माना जाता है कि 17 वीं शताब्दी के दौरान बालंद राजा कोरिया के वास्तविक शासक थे। स्थानीय पौराणिक कथाओं के अनुसार, मंदिर के देवता के पास जबरदस्त शक्तियां थी और वह अपने सभी विश्वासियों की सभी इच्छाओं को पूरा करते थे।

इच्छा पूरी होने पर बकरी के रक्त का बलिदान चढ़ाते है। इस बकरी के खून को फिर एक 6 इंच गहरे तालाब में डाल दिया जाता है जिसे कुंड के नाम से जाना जाता है। हजारों बकरियों के खून से भरे होने के बावजूद यह कुंड या तालाब कभी भी ओवरफ्लो नहीं होता है। कहा जाता है कि भक्त बकरी का रक्त चढ़ाकर अपने सपनों और इच्छाओं की पूर्ति की उम्मीद करते हैं।

कुदरगढ़ मेला

कुदरगढ़ मेला का आयोजन चैत्र नवरात्री में किया जाता है जब मेला लगता है तो बड़ी संख्या में लोग कुदरगढ़ी माँ की दर्शन के लिए आते है यह मेला पहाड़ियों के बीच लगता है पहाड़ियों के बीच में लगने के कारण प्राकृतिक सुन्दरता के साथ मेला की सुन्दरता और बढ़ जाती है।

कुदरगढ़ का फोटो

कब और कैसे जाये

कुदरगढ़ सूरजपुर जिला का सबसे खूबसूरत स्थलों में से एक है। आप वहाँ कभी भी जा सकते है लेकिन ठण्ड का मौसम घुमने के लिए बहुत ही अच्छा होता है। चैत्र नवरात्री में मेला लगता है तब भी आप वहाँ घूमने जा सकते है। सूरजपुर सड़क मार्ग और रेलवे मार्ग दोनों से पहुँचा जा सकता है।

  • वायु मार्ग :- सूरजपुर का निकटतम हवाई अड्डा रायपुर हवाई अड्डा है।
  • निकटतम रेलवे स्टेशन :- सूरजपुर रेलवे स्टेशन।
  • निकटतम बस स्टैंड :- सूरजपुर बस स्टैंड।
अंबिकापुर से कुदरगढ़ की दुरी कितनी है ?

अंबिकापुर से कुदरगढ़ की दुरी लगभग 82 किलोमीटर है।

कुदरगढ़ में कौन सी माता का मंदिर है ?

कुदरगढ़ में बागेश्वरी माता का मंदिर है।