बूढ़ा घाघ जलप्रपात: झारखंड पेड़ों, पौधों, जंगल, पहाड़ों, और नदियों से घिरा हुआ है। इस राज्य को प्रकृति ने अपनी सुन्दरता से भर दिया है। यहां कई खूबसूरत प्राकृतिक जगहें हैं। नदी, पहाड़, जंगल और झाड़ियों के साथ-साथ झारखंड अपने झरनों के लिए भी सबसे खास और अलग है। जंगलों के बीच यह एक ऐसा स्थान है जहां प्रकृति की आवाज अन्य सभी आवाजों पर विजय प्राप्त करती है। पानी की गड़गड़ाहट के कारण आप बोल तो पायेंगे लेकिन सुन नहीं पाएंगे। स्थान का उद्देश्य दृश्यों का आनंद लेना और प्रकृति का जो कहना है उसे सुनना है।

सुन्दरता से भरा नजारा और सुहावने मौसम के कारण प्रकृति के साथ कुछ समय बिताने के लिए यह एक बढ़िया क्षेत्र है। लोध जलप्रपात की लुभावनी जगहें दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। तो इस लेख में हम घनें जंगलों के बीच स्थित और प्राकृतिक सुन्दरता से भरा लोध जलप्रपात (बूढ़ा घाघ जलप्रपात) के बारे में जानेगें।

बूढ़ा घाघ जलप्रपात के बारे में जानकारी

बूढ़ा घाघ जलप्रपात (लोध जलप्रपात)

लोध जलप्रपात, जिसे बूढ़ा घाघ जलप्रपात भी कहा जाता है, यह बूढ़ा नदी पर स्थित है यह झारखंड के लातेहार जिले के पलामू संभाग में जलप्रपात का एक रत्न है। यह लातेहार जिला के महुआडांड़ से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह इस क्षेत्र के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। लोध जलप्रपात एक शानदार जलप्रपात है जो अपनी ऊंचाई और सुंदरता के लिए जाना जाता है। झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात और भारत का 21वां सबसे ऊंचा जलप्रपात है। लोध जलप्रपात की दहाड़ करीब 10 किलोमीटर की दूरी से सुनी जा सकती है। लोध जलप्रपात एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल है, जो झारखंड के सबसे ऊंचे जलप्रपातों में से एक है। लगभग 468 फीट की उल्लेखनीय ऊंचाई ने इसे देश के सबसे ऊंचे फॉल्स में से एक बना दिया है।

भगवान बुद्ध को समर्पित एक मंदिर लोध जलप्रपात के पास स्थित है। मंदिर का वातावरण शांत है पानी की गड़गड़ाहट के बीच में पक्षी अपनी प्यारी आवाज से इस सुन्दर झरना को और अधिक संगीतमय बना देता है। पर्यटक मंदिर में भगवान बुद्ध की पूजा करने और साथ ही प्राकृतिक वातावरण में समय बिताने के लिए आते हैं।

फॉल्स छोटा नागपुर पठार के जंगलों में बुरहा नदी पर स्थित हैं। लोध जलप्रपात के बारे में अनोखा बात यह है कि यह अपनी पूरी यात्रा में कई अन्य धाराओं से जुड़ा हुआ है और चट्टानों से होते हुए जबरदस्त ऊंचाई से गिरता है और एक मनोरम गड़गड़ाहट की आवाज पैदा करता है।

लोध जलप्रपात की एक और आकर्षक विशेषता यह है कि कितना गहरा है, यह कोई नहीं जानता। लाख कोशिशों के बाद भी इसकी गहराई का पता कोई नहीं लगा पाया है। स्थानीय लोग गहराई नापने के लिए बड़े-बड़े पत्थरों को लंबी रस्सियों से बांधते थे लेकिन शिलाखंड बहुत नीचे में डूब गए और कोई निशान नहीं मिला।

लोककथाओं के अनुसार, स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर सात खटिया बनाने के लिए आवश्यक लंबी रस्सियों से जलमग्न करके इसकी गहराई को मापने का प्रयास किया। लेकिन अफसोस! अब भी गहराई समझ से परे है।

बूढ़ा घाघ जलप्रपात का फोटो


बूढ़ा घाघ जलप्रपात कब और कैसे जाएँ

अगर आप इस प्राकृतिक अजूबे के साथ कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो मानसून के दौरान जाएँ मानसून के दौरान झरना, पहाड़ियों का सौन्दर्य और भी सुन्दर हो जाता है।जाने की बात करे तो आपके पास कई विकल्प हैं। रांची और नेतरहाट हैं जो आगंतुकों के लिए विभिन्न प्रकार के होटल विकल्प प्रदान करते हैं। पर्यटक अपनी सुविधानुसार विकल्प चुन सकते हैं

  • निकटतम हवाई अड्डा –  बिरशा मुंडा हवाई अड्डा, रांची, रांची पहुंचने के बाद रांची से लोध फॉल वॉटरफॉल के लिए कैब लें।बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से लोध फॉल वॉटरफॉल की दूरी 183.3 किमी वाया घाघरा-नेतरहाट।
  • निकटतम रेलवे स्टेशन – निकटतम रेलवे स्टेशन बरवाडीह स्टेशन है। बरवाडीह जंक्शन से लोध जलप्रपात की दूरी बरवाडीह छिपाडोहर रोड के माध्यम से 56.9 किमी है।
  • सडक मार्ग –  रांची से लोध फॉल, वाया नेतरहाट-217.4km

इन्हें भी देखें

सवाल जवाब

सभी के मन में घुमने जाने से पहले उस जगह के बारे में जानने की इच्छा होती ही है तो आपके मन में उठने वाले कुछ सवाल जवाब नीचे दिए जा रहे है।

बूढ़ा घाघ जलप्रपात किस नदी पर है?

बूढ़ा घाघ जलप्रपात बूढ़ा नदी पर स्थित है।


बूढ़ा घाघ जलप्रपात कहां है?

पलामू संभाग के लातेहार जिले में स्थित है।

लोध जलप्रपात की ऊंचाई कितनी है?

बूढ़ा घाघ जलप्रपात की ऊँचाई 143 मीटर एवं समुद्र तल से ऊँचाई 137 मीटर है।

 झारखंड में सबसे ऊंचा जलप्रपात कौन सा है?

बूढ़ा घाघ जलप्रपात।

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