बरसाना में घूमने की जगह: कृष्ण जी के नाम से पहले आता है राधा जी का नाम और राधा जी की नगरी है बरसाना। यहाँ की होली पुरे विश्व भर में महशूर है तो जिस प्रकार बरसाना के लोग होली में होली के रंग से रंग जाते है। इस लेख के माध्यम से बरसाना में घूमने की जगह के बारे में जानेंग:

बरसाना एक लोकप्रिय धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ लोकप्रिय लट्ठमार होली के लिए भी जाना जाता है और कृष्ण जन्माष्टमी,राधा अष्टमी पर होने वाले बड़े-बड़े आयोजन के वजह से भारत ही नहीं पुरे विश्व में बहुत प्रसिद्ध है। माता राधा का जन्मस्थान होने के कारण, बरसाना में प्रमुख आकर्षण उनके जीवन और उनके पालन-पोषण के लिए समर्पित मंदिर हैं। राधा कृष्ण को समर्पित कई मंदिर भी हैं जो लोकप्रिय तीर्थ स्थल हैं।

लट्ठमार होली को नियमित होली की तुलना में अलग तरीके से मनाया जाता है, क्योंकि जैसा कि नाम से पता चलता है, इसमें लाठी का इस्तेमाल किया जाता है। लोककथाओं के अनुसार, कृष्ण एक बार होली के दौरान राधा से मिलने और उसे ताना मारने के लिए बरसाना गए थे। इस पर नाराज होकर राधा और उसके साथी लाठियों से कृष्ण का पीछा करने लगे। परंपरा का पालन करते हुए, नंदगाँव के पुरुष जो होली उत्सव के दौरान बरसाना की यात्रा करते हैं, तो यहाँ की महिलाओं द्वारा लाठी-डंडों से स्वागत की जाती है।

बरसाना में घूमने की जगह | बरसाना के प्रमुख पर्यटन स्थल

बरसाना में घूमने के लिए कई सारे पर्यटन स्थल हैं जिनमें से कुछ के बार में नीचे बताया गया है। आइए एक एक करके बरसाना के प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में जानते है:

श्रीजी मंदिर (राधा रानी मंदिर)

बरसाना में घूमने की जगह के बारे में जानें

राधा रानी का मंदिर बरसाना के एक छोटे से पहाड़ी पर लगभग 250 मीटर की ऊँचाई पर है हिंदू मंदिर बरसाना में स्थित है और राधा के जन्म के स्थान, भानुगढ़ चोटी पर एक रिज पर फैला हुआ है। मेहराबों, स्तंभों और लाल बलुआ पत्थर के साथ, श्रीजी मंदिर, मुगल-युग की इमारत जैसा दिखता है। बरसाना के इस प्रसिद्ध मंदिर का निर्माण पुराने स्थापत्य डिजाइन का उपयोग करके किया गया था। यह ब्रजभूमि क्षेत्र में सबसे अधिक बार आने वाले मंदिरों में से एक है और इसे राधा रानी मंदिर (जिसमें बरसाना एक हिस्सा है) के रूप में भी जाना जाता है। राधा जी को बरसान के लोग लाडली जी बोलते थे इस कारण मंदिर को बरसाना की लाडली जी भी कहा जाता है,

मंदिर में राधा और भगवान कृष्ण की मूर्ति हैं। मंदिर के मुख्य द्वार पर जाने के लिए आपको 200 सीढ़ियां चढ़नी होंगी। मंदिर लगभग सुबह 8:30 am में खुल जाती है मंदिर से बरसाना का नजारा देखने लायक होता है पूरा बरसाना इस मंदिर से दिखताई देता है। मंदिर अपने ऐतिहासिक पहलू के साथ-साथ अपनी शानदार वास्तुकला और निर्माण के कारण आगंतुकों और उपासकों को आकर्षित करता है। मंदिर का निर्माण राजा वीर सिंह ने सन 1675 में करवाया था एक अन्य प्रमुख आकर्षण कलाकृति है दिखाई देती है वह है राधा और कृष्ण की लीलाओं के दृश्य, जो मंदिर की दीवारों और छत पर दिखाई देती है राधा और कृष्ण को आनंद लेते हुए बहुत ही सुन्दर कलाकृति बनाया गया है।

श्री राधा कुशल बिहारी मंदिर

श्री राधा कुशल बिहारी मंदिर, राधा रानी मंदिर जिस पहाड़ी की चोटी पर उसी पहाड़ी में राधा रानी मंदिर से लगभग 50 मीटर की दूरी पर है यदि आप राधा रानी मंदिर जा रहे हैं तो इस खुबसूरत मंदिर का भी दर्शन करने अवश्य जायें, यह मंदिर राजस्थानी किलों से कितना मिलता-जुलता दिखाई देता है इस मंदिर का निर्माण जयपुर रियासत के महाराजा सवाई माधोसिंह ने करवाया था। राजा की पत्नी कुशला बाई के नाम पर मन्दिर का नामकरण कुशल बिहारी मंदिर किया गया। यह मंदिर अपने स्थात्य शैली के लिए प्रसिद्ध है इस मंदिर के निर्माण के लिए भरतपुर में स्थित बंसी पहाड़पुर से पत्थर मंगवाकर करवाया गया था इस मंदिर को बनने में 14 वर्ष लगे। गहवर वन की घनी हरियाली के बीच मंदिर का सामने का भाग बादाम के रंग का है जो बहुत ही खुबसूरत है मुख्य मंदिर के पास एक और छोटा मंदिर है। इसमें भगवान कृष्ण और देवी राधा की काले पत्थर और मिश्र धातु की मूर्तियाँ हैं।

नोट:- यहाँ कार पार्किंग के लिए जगह भी बनाया गया है, आप वहाँ तक भी अपनी गाड़ी ले जा सकते है पार्किंग का शुल्क है 40 रु./गाड़ी।

दान बिहारी मंदिर

बरसाना के सबसे पुराने मंदिरों में से एक, दान बिहारी मंदिर, 800+ साल पुराना माना जाता है। जिस तरह से इसे डिजाइन और निर्मित किया गया है, यह उलेखनीय है। उत्तर प्रदेश के कई मंदिरों की तरह इसका नाम एक पौराणिक कहानी से जुड़ा है।

संस्कृत में, “दान” शब्द दान को दर्शाता है, जबकि “बिहारी” शब्द भगवान कृष्ण को संदर्भित करने का एक दयालु तरीका है। किंवदंती के अनुसार, एक बार एक गरीब ब्राह्मण ने अपनी बेटी की शादी के लिए आवश्यक धन जुटाने के लिए संघर्ष किया। अपने दुःख में, उन्होंने कृष्ण के बारे में सोचा। गरीब आदमी की पीड़ा से प्रभावित भगवान कृष्ण ने राधा के वजन के बराबर सोने को व्यवस्थित किया और उसे उपहार के रूप में दिया। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने अपने असीम प्रेम का एक और प्रमाण दिखाया,और इस तरह मंदिर का नाम दान बिहारी मंदिर पड़ा।

रंगीली महल

जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज के अनुमोदन से, श्री स्वामी प्रकाशानंद सरस्वती द्वारा 1996 में पवित्र बरसाना क्षेत्र में रंगीली महल की स्थापना की गई थी। पहले आम लोग भी इस महल में जा सकते थे लेकिन अब इसे आश्रम में बदल दिया गया। रंगीली महल में, हॉल के चारों ओर श्री राधा कृष्ण की लीलाओं के चित्रण के साथ एक बड़ा सत्संग हॉल है। गुरु पूर्णिमा पर, हजारों भक्त श्री महाराजजी को सम्मानित करने के लिए आश्रम आते हैं। जेकेपी रंगीली महल में, श्री महाराजजी की उपस्थिति, भक्ति कीर्तन और परिक्रमा हर दिन होते हैं। रंगीली महल में कीर्ति मैया मंदिर मंदिर और जगद्गुरु कृपालु अस्पताल भी है।

कीर्ति मंदिर

बरसाना में घूमने की जगह की सूची में कीर्ति मंदिर सबसे प्रमुख स्थलों में से एक है। अनोखा कीर्ति मंदिर, जो श्री राधारानी की देवी मां कीर्ति को समर्पित मंदिर है, पूरे भारत में एकमात्र ऐसा मंदिर है जो राधा रानी की माँ कीर्ति को समर्पित हैं। यह मंदिर बहुत खुबसूरत है बरसाना के रंगीली महल परिसर में बना यह भव्य कीर्ति मंदिर वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है इस मंदिर का निर्माण जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज ने करवाया है। यह मंदिर, जो रंगीली महल के करीब है, यह लगभग 30 एकड़ से अधिक भूमि में फैला हुआ यह मंदिर बहुत ही खुबसूरत पत्थरों से बनाया गया है, इसकी खूबसूरती लोगो को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

मान मंदिर

बरसाना में ब्रह्मगिरी पर्वत के शिखर पर स्थित यह स्थान, श्री राधारानी के मान शगल की याद दिलाता है। लोककथा के अनुसार, राधारानी ने एक बार कृष्ण के आगमन की प्रतीक्षा की थी। लेकिन कृष्ण के लिए बहुत देर हो चुकी थी। इसके तुरंत बाद, राधारानी का पालतू तोता आया और राधारानी को कृष्ण की चंद्रावली, एक गोपी के साथ मिलन की सूचना दी, जिसने उनकी मंदता का कारण बना। नतीजतन, उसने गुस्से से बाहर मान का प्रदर्शन किया।

मानगढ़ के लिए ब्रज का एक विशेष स्थान है। इधर श्यामसुंदर ने राधा रानी को शांत कराया। उसने उसके मूड को हल्का करने के लिए कई तरह की तकनीकों का इस्तेमाल किया था, जिसमें उसके पैरों पर अपना सिर रखना, उस पर हवा फूंकना, उसे आईना दिखाना और कभी-कभी बहुत प्रार्थना करना शामिल था। हालाँकि, श्यामसुंदर अपने दोस्तों की मदद लेता है जब राधा रानी उससे खुश नहीं होती है। वहाँ आयोजित गतिविधियों के कारण इस स्थान को “मान गढ़” कहा जाता है। कृष्ण और राधा के बीच झगड़े और सुलह, जो उनके रिश्ते का एक सुखद लेकिन दर्दनाक हिस्सा हैं, इस मंदिर में जाने से आपको इसकी छलक देखने को मिलेगा।

बरसाना तक कैसे पहुँचे

भारत के अलग-अलग जगह से बरसाना जाना चाहते है तो हवाई मार्ग, रेल मार्ग,बस के माध्यम से वहाँ पहुच सकते है।

  • निकटतम हवाई अड्डा:- आगरा निकटतम हवाई अड्डा है आगरा से बरसाना के बीच की दूरी लगभग 116 किमी. है।
  • निकटतम रेलवे स्टेशन:- कोसीकला रेलवे स्टेशन है कोसीकला से बरसाना की दूरी लगभग 19 किमी. है।

सवाल जवाब

बरसाना अभी कहाँ है?

बरसाना उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में एक मध्यकालीन शहर और नगर पंचायत है। कहा जाता है कि हिंदू देवता राधा, कृष्ण की पत्नी, बरसाना को घर बुलाती हैं। यह ब्रज के क्षेत्र में है।

बरसाना और वृंदावन कहाँ स्थित हैं?

बरसाना और वृंदावन दोनों भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा जिले के ब्रज क्षेत्र में स्थित हैं

बरसाना कब खुला है?

बरसाना सुबह 5:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक लोगों के लिए पूरे दिन खुला रहता है। और शाम 5:00 बजे रात 9:00 बजे तक मंदिरों में दर्शन करने के लिए।

बरसाना क्यों प्रसिद्ध है?

ऐसा माना जाता है कि बरसाना भगवान कृष्ण की पत्नी राधारानी का घर था और राधा रानी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है।

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