अयप्पा शनेश्वर मंदिर: विश्रामपुर छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले का एक छोटा सा शहर है। जो एशिया का एक बड़ा कोल माइंस के लिए प्रसिद्ध है यहाँ कोल माइंस होने के साथ-साथ कई मंदिर, वाटर पार्क, झरना,पहाड़ी है जो की पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है, इसी छोटा सा में शहर अयप्पा शनेश्वर मंदिर है तो आइये इस लेख में हम अयप्पा मंदिर के बारे में जानेंगे।

विश्रामपुर में स्थित अयप्पा शनेश्वर मंदिर के बारे जानकारी

अयप्पा शनेश्वर मंदिर

अयप्पा शनेश्वर मंदिर विश्रामपुर बस स्टैंड से लगभग आधा किलोमीटर दूर है। हिंदू भगवान अयप्पा का सबसे लोकप्रिय अयप्पा स्वामी मंदिर केरल के सबरीमाला में है, हालांकि उनके उपासक पूरे देश में फैले हुए हैं। अयप्पा स्वामी मंदिर पूरे भारत के जगह-जगह में हैं। अन्य देशों में भी कई भगवान अयप्पा मंदिर हैं, जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका में अयप्पा मंदिर, शिकागो में अयप्पा मंदिर, और इसी तरह बहुत जगह इनकी भक्ति की जाती है।

अयप्पा शनेश्वर मंदिर विश्रामपुर शहरों में प्रसिद्ध है। अयप्पा मंदिर बिश्रामपुर में एक बहुत ही शांत क्षेत्र में स्थित है, जिसमें सभी प्रकार की धार्मिक और भक्ति गतिविधियों के लिए पर्याप्त जगह है।

अयप्पा स्वामी जन्म कथा

भगवान शिव और मोहिनी का एक पुत्र है जिसका नाम अयप्पा है। मोहिनी भगवान विष्णु की महिला अवतार हैं। भगवान विष्णु मोहिनी अवतार को भस्मासुर के वध का कार्य सौंपते हैं। भस्मासुर किसी के सिर को छूकर ही उसकी हत्या करने की क्षमता रखता है। भस्मासुर को यह शक्ति भगवान शिव ने दी थी, लेकिन इसकी परीक्षा लेने के लिए भस्मासुर भगवान शिव के सिर को छूना चाहता था, इस प्रकार भगवान विष्णु मोहिनी का रूप बन गए। भस्मासुर को मोहिनी से प्यार हो जाता है और वह अपने ही सिर को छूकर खुद को मार लेता है।

भगवान शिव भी मोहिनी की ओर आकर्षित होते हैं। भगवान शिव और मोहिनी के युग्मन के परिणामस्वरूप, भगवान अयप्पा (भगवान विष्णु) का जन्म हुआ। भगवान शिव और मोहिनी के युग्मन के परिणामस्वरूप, भगवान अयप्पा (भगवान विष्णु) का जन्म हुआ। नतीजतन, भगवान अयप्पा को हरिहरन पुथिरन के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अनुवाद “भगवान शिव और विष्णु के पुत्र” के रूप में किया जाता है। भगवान विष्णु को ‘हरि’ कहा जाता है, जबकि भगवान शिव को ‘हरन’ कहा जाता है।

भगवान अयप्पा स्वामी जन्मदिन की तारीख

तमिल कैलेंडर पंगुनी उथिराम को अयप्पा स्वामी के जन्मदिन की तारीख मानते है। तमिलनाडु में, पंगुनी उथिराम एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार होता है। यहाँ इस दिन को हर साल अय्यप्पन जयंती मनाई जाती है। तमिल भाषी क्षेत्रों में यह त्योहार तीन दिनों तक बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पंगुनी तमिल कैलेंडर का आखिरी महीना होता है। इसके बाद तमिल नववर्ष शुरू हो जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, यह मार्च या अप्रैल का महीना होता है ।

अयप्पा शनेश्वर मंदिर का इतिहास

अयप्पा शनेश्वर मंदिर का निर्माण बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों की मदद से 15 जनवरी 1984 को किया गया था। मंदिर को केरल के सबरीमाला में अयप्पा स्वामी मंदिर की तरह ही डिजाइन किया गया है। केरल के एक पुजारी ब्रह्मश्री महेश्वरन आदिरामन भट्टराई भगवान अयप्पा की मूर्ति को स्थापित किये थे। केरल के प्रसिद्ध मूर्ति निर्माता ने अष्टधातु से भगवान अयप्पा की एक मूर्ति को उकेरा है।

भगवान अयप्पा की पूजा के तरीके

अयप्पा शनेश्वर मंदिर में भगवान अयप्पा की प्रार्थना उसी तरह की जाती है जैसे केरल के सबरीमाला में अयप्पा स्वामी मंदिर में की जाती है। भगवान अयप्पा और भगवान शनि का गहरा संबंध है। अयप्पा का भक्त जो 41 दिनों तक अयप्पा दीक्षा को सही तरीके से करता है, वह सात साल की शनि दशा से छुटकारा पाता है। अन्य भगवान की मूर्तियां, जैसे भगवान शनि और भगवान गणेश भी इस मंदिर में मौजूद हैं। इस मंदिर का नाम अय्यपा स्वामी मंदिर या शनि मंदिर स्थानीय लोगों द्वारा दिए गए नाम हैं।

अयप्पा सेवा समिति

अयप्पा मंदिर के बाहर, ऐसी कोई दुकान नहीं है जहाँ आप भगवान अयप्पा की पूजा के लिए प्रसाद और अन्य सामान खरीद सकें। श्री अयप्पा सेवा समिति अयप्पा मंदिर के पूरे प्रबंधन की देख रेख करती है। तो मंदिर के अंदर एक काउंटर है जो सभी पूजा सामग्री, फल, मिठाई और अन्य सामान बेचता है जो भगवान अयप्पा को अर्पित किए जा सकते हैं।

एक बोर्ड पर मंदिर के अंदर की जा सकने वाली पूजाओं की एक विस्तृत सूची है। सूची में सभी प्रकार की पूजा की लागत भी शामिल है। आपको काउंटर पर खरीदी गई वस्तु के साथ-साथ मंदिर के अंदर की जाने वाली पूजा का बिल दिया जाएगा। श्री अयप्पा सेवा समिति दक्षिण भारत के लोगों से बनी है। अयप्पा स्वामी मंदिर के पुजारी भी दक्षिण भारत से हैं।

त्यौहार

भगवान अयप्पा स्वामी सबसे प्रसिद्ध त्योहार मकर संक्रांति से जुड़े हैं, स्थानीय समुदाय और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एक सरकारी कंपनी) इस दिन सभी उपासकों के लिए एक वार्षिक समारोह और दावत का आयोजन करते हैं। हर साल इस दिन बड़ी संख्या में भक्त भगवान अयप्पा की पूजा करने के लिए आस-पास के शहरों से जाते हैं।

अय्यप्पा शनेश्वर मंदिर की वर्षगांठ बड़े पैमाने पर मनाई जाती है, जिसमें कई अय्यप्पन अनुयायी भाग लेते हैं। प्राण प्रतिष्ठा की जयंती पर भक्तों के लिए अखंड नाम यज्ञ, भजन, आरती और भंडारा जैसे कई भक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाते है।

अयप्पा मंदिर प्रवेश टिकट

भगवान अयप्पा के उपासकों को विश्रामपुर के अयप्पा मंदिर में प्रवेश करने के लिए टिकट की आवश्यकता नहीं होती है। मंदिर में प्रवेश करने के लिए दो प्रवेश द्वार हैं। मंदिर का मुख्य द्वार मंदिर के अंदर भगवान अयप्पा के सामने है। मुख्य द्वार वर्ष में केवल एक बार, 15 नवंबर को विश्व प्रसिद्ध त्योहार के दौरान खुला रहता है।

अयप्पा मंदिर खुलने का समय

दुर्लभ अवसरों को छोड़कर, मंदिर में बहुत कम भीड़ होती है। आप आराम से दर्शन प्राप्त कर सकते हैं और मंदिर की भक्ति कर सकते हैं।

  • रविवार से शुक्रवार
    • सुबह 05:00 बजे से सुबह 10:00 बजे तक
    • शाम 05:00 बजे से शाम 08:00 बजे तक
  • शनिवार को
    • सुबह 05:00 बजे से सुबह 11:00 बजे तक
    • शाम 05:00 बजे से शाम 09:00 बजे तक

अयप्पा मंदिर कैसे पहुंचे

यदि आप बिश्रामपुर पहुँचते हैं तो आप अयप्पा शनेश्वर मंदिर तक बहुत आसानी से पहुँच सकते हैं। यह मंदिर विश्रामपुर बस स्टैंड के पास है। विश्रामपुर में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा भी है चाहे तो आप अपने वाहनों से भी वहां आसानी से जा सकते हैं।

निकटतम बस स्टैंड :- विश्रामपुर बस स्टैंड है यह मंदिर बस स्टैंड से लगभग आधा किलोमीटर दूर है। आप इस तरह पैदल भी अधिकतम 10 मिनट में पहुंच सकते हैं। विश्रामपुर सूरजपुर जिले का एक छोटा सा शहर है, लेकिन यह वाराणसी, रेणुकूट, रायपुर, अंबिकापुर, पटना, आदि जैसे विभिन्न शहरों से निजी परिवहन बस सेवाओं द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

निकटतम रेलवे स्टेशन:- विश्रामपुर रेलवे स्टेशन है यह रेलवे द्वारा भी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप अनूपपुर या कटनी से विश्रामपुर के लिए ट्रेन ले सकते हैं। लेकिन विश्रामपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बहुत कम है। यहां ट्रेन से भी पहुंच सकते हैं, विश्रामपुर रेलवे स्टेशन मुख्य बाजार से लगभग 1 किमी दूर है। रेलवे स्टेशन से आपको एक निजी वाहन लेना होगा क्योंकि अयप्पा मंदिर तक जाने के लिए कोई सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं है। वहां जाने के लिए आपको प्राइवेट टैक्सी या ऑटो बुक करना होगा। अगर आपके पास अपना वाहन है तो यह सबसे अच्छा है।

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सवाल जवाब

अयप्पा शनेश्वर का मंदिर कहाँ है?

अयप्पा शनेश्वर का मंदिर विश्रामपुर में है।

अयप्पा मंदिर खुलने का समय क्या है?

सुबह 05:00 बजे से सुबह 10:00 बजे तक
शाम 05:00 बजे से शाम 08:00 बजे तक

अयप्पा शनेश्वर मंदिर विश्रामपुर से कितनी दूरी पर है?

अयप्पा शनेश्वर मंदिर विश्रामपुर बस स्टैंड से लगभग आधा किलोमीटर दूर है।