चित्रकोट जलप्रपात: बस्तर छत्तीसगढ़ राज्य का एक ऐसा जिला है जो खुबसूरत जंगलों और आदिवासी संस्कृति में रंगा है। बस्तर पुरे राज्य में सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जाना जाता हैं सांस्कृतिक, कलाकृतियों के साथ-साथ यह पहाड़ों, जंगलों, झरनों, और नदियों से घिरा अपने अंचल में कई राज समेटे हुए है। प्रकृति के असली सौन्दर्य को अपने रोम-रोम में समेटे इस जिला में जंगलो के बीच स्थित खुबसूरत चित्रकोट जलप्रपात जो छ.ग. के सबसे बड़े जलप्रपात से जाना जाता है। तो इस लेख में हम खुबसूरत चित्रकोट जलप्रपात के बारे में जानेंगे आखिर इसे ही क्यों छ. ग. का बड़ा जलप्रपात कहा जाता है।

चित्रकोट जलप्रपात: भारत का नियाग्रा जलप्रपात के बारे में जानकारी

चित्रकोट जलप्रपात | भारत का नियाग्रा जलप्रपात

भारत में स्थित छत्तीसगढ़ कई सारे प्राकृतिक सम्पदा को बिखेरे हुए है उन्ही में से एक है बस्तर क्षेत्र में इंद्रावती नदी पर एक प्राकृतिक झरना है। जो जगदलपुर से लगभग 40 किलोमीटर और रायपुर से लगभग 273 किलोमीटर दूर है जो है चित्रकोट जलप्रपात। चित्रकोट जलप्रपात छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा और सबसे अधिक जल धारण करने वाला जलप्रपात है। इसे भारत का नियाग्रा फॉल भी कहा जाता है, यह बस्तर संभाग का सबसे लोकप्रिय जलप्रपात है। यह ओडिशा के कालाहांडी जिले के विंध्य रेंज पहाड़ियों से निकलती है, और पश्चिम की ओर चलते हुए चित्रकोट में गिरती है और इस तरह यह 240 मील (390 किमी) की यात्रा के बाद भद्रकाली के पास गोदावरी नदी में गिरती है। लगभग 93 फीट की ऊंचाई से गिरने वाले ये जलप्रपात बस्तर क्षेत्र में हैं।

जगदलपुर से निकटता के कारण इसने एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल के रूप में एक पहचान बना ली है। लगभग 29 मीटर ऊंचे (93 फीट) हैं। मानसून के मौसम के दौरान, यह लगभग 300 मीटर (980 फीट) की चौड़ाई तक पहुँच जाता है, जिससे यह भारत का सबसे चौड़ा झरना बन जाता है। इसकी तुलना अक्सर संयुक्त राज्य अमेरिका में विश्व प्रसिद्ध नियाग्रा फॉल्स से की जाती है और यह घोड़े की नाल के रूप में होने के कारण इसे “छोटा नियाग्रा फॉल्स” कहा जाता है। वर्षा ऋतु के दौरान झरने से धुंध पर प्रतिबिंबित सूर्य की किरणों से इंद्रधनुष बनते हैं। इस जलप्रपात की अनूठी विशेषता यह है कि बारिश के दिनों में जहां पानी लाल होता है, वहीं गर्मियों की चांदनी रातों में यह पूरी तरह से सफेद दिखाई देता है जो पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है।

चित्रकूट जलप्रपात आसपास के घने जंगलों के बीच में हैं। अगर आप वहां जाएंगे तो रंग बिरंगे उड़ते पक्षियों को खूबसूरती देखकर मोहित जाएंगे। ये ऐसे क्षण हैं जो आपको प्रकृति की भव्यता को प्रत्यक्ष रूप से देखने की अनुमति देते हैं। रात की ख़ामोशी में झरने में झरने की आवाज आपको 3 से 4 किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है मानो पानी की हर एक बुँदे चीख-चीख कर चित्रकोट से गिरने की गौरवगाथा का गान कर रही हो।

इन झरनों के किनारे पर भगवान शिव को समर्पित मंदिर है साथ ही वहाँ बहुत सारे छोटे-बड़े शिवलिंग है इनमे कई सरे प्राचीन काल के माने जाते है और पार्वती गुफा भी पास में हैं, प्राकृतिक रूप से निर्मित गुफाओं की एक श्रृंखला हैं। और झरना का पानी इन शिवलिंग में इस तरह गिरते है मानो शिवलिंग का जलाभिषेक हो रहा हो।

बस्तर के झरने जितने लुभावने हैं, यहां का बाजार चौराहा भी उतना ही प्यारा है। जहां देशी कला और संस्कृति की छटा देखने को मिलती है। बस्तर के आदिवासी पारंपरिक कला कौशल भारत की आदिवासी कलाओं में प्रसिद्ध हैं। बस्तर अपनी अनूठी कलाकृतियों के लिए प्रसिद्ध है। बस्तर के आदिवासी समूह पीढ़ी दर पीढ़ी इस असामान्य शिल्प को आगे बढ़ाते रहे हैं लेकिन जागरूकता की कमी के कारण, यह उनके घरों के पास लगने वाले साप्ताहिक हाट मेलों तक ही सीमित है।

बस्तर की कौशल कला की मुख्य श्रेणियां काष्ठ कला, बांस कला, पृथ्वी कला और धातु कला हैं। लकड़ी से बनी वस्तुएँ लकड़ी की अधिकांश कलाएँ बनाती हैं। वहाँ के आदिवासी लकड़ी से जानवरों, देवताओं और सजावटी कलाकृतियों को तराशते हैं, जिसे वे जीवन यापन के लिए बाजार में बेचते हैं। अनोखा पहलू यह है कि वे इस प्रक्रिया में किसी मशीनरी का उपयोग नहीं करते हैं। बांस कला में घरेलू फर्नीचर जैसे बांसुरी, बांस की कुर्सियाँ, टेबल, टोकरियाँ और चटाई भी शामिल हैं। मिट्टी की कला में मिट्टी के सजावटी बर्तन, बर्तन, देवी-देवताओं की मूर्तियाँ, और इसी तरह धातु कला में, तांबे और टीम मिश्रित धातु से बनी कलाकृतियाँ भी आदिवासी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण घटक हैं।

चित्रकोट जलप्रपात का फोटो

चित्रकोट जलप्रपात जाने का सबसे अच्छा समय

चित्रकोट जलप्रपात को देखने का सबसे अच्छा समय मानसून के मौसम के दौरान होता है लेकिन वर्ष के किसी भी समय देखा जा सकता है, जुलाई से अक्टूबर तक, जब जलप्रपात अपने सबसे शानदार चरम पर होता है। सर्दियों के दौरान, मौसम हल्का होता है और पानी दूधिया सफेद होता है। इसलिये सर्दियों में चित्रकूट झरने की यात्रा करने का शानदार समय है।

चित्रकूट जलप्रपात से आसपास के आकर्षण पर्यटन

तामड़ा घुमर जलप्रपात: तामड़ा घुमर जलप्रपात दुनिया के सबसे खूबसूरत झरनों में से एक है। जो गुलजार शहर से दूर एक अलग जगह में दफन है, जो दोनों तरफ से सुंदर हरी घास के मैदानों से घिरा हुआ है। तमरा घूमर एक प्राकृतिक जलप्रपात है जो 100 फीट से अधिक की ऊंचाई तक पहुंचता है।यदि चित्रकूट झरने से ही तमरा घुमर वॉटरफॉल जाना चाहते है तो 20 मिनट की रास्ता है और आगंतुकों और स्थानीय लोगों के साथ दिन में पिकनिक मनाने के लिए एक लोकप्रिय स्थल है। तमरा घूमर अपनी शांत, मोटी घाटियों और राजसी पहाड़ियों के लिए जाना जाता है।

मेंदरी घूमर झरना: चित्रकोट जलप्रपात से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मेंदरी घूमर जलप्रपात एक प्राकृतिक जलप्रपात है जो मानसून के मौसम में निकलता है। जगदलपुर में मेंदरी घूमर, चित्रकोट बारासुर और तीर्थ के बीच स्थित है। लगभग 70 मीटर ऊंचा जलप्रपात सुंदर हरी-भरी वनस्पतियों से घिरा हुआ है। ग्रीष्मकाल में जलप्रपात अधिक धीरे-धीरे गिरता है और मानसून के दौरान यह ओवरफ्लो हो जाता है।

चित्रधारा जलप्रपात: चित्रधारा जलप्रपात चित्रकूट जलप्रपात के रास्ते में जगदलपुर से लगभग 19 किमी दूर है। यह छत्तीसगढ़ राज्य के मध्य में घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है। यह स्थान बस्तर जिले के सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक है यह पोटानार नामक एक छोटे से शांतिपूर्ण गांव के करीब है और पूरे राज्य और देश से आगंतुक इस जलप्रपात को देखने जाते हैं। यह परिवार और दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक बन गया है और पानी की तेज गति से पहाड़ी से नीचे जाते हुए देखें और जमीन से टकराकर की आवाज बहुत दूर तक सुने देता हैं हवा के साथ पानी की बूंदों का छींटे बहुत ही सुखद होती है। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और झील में साफ पानी के कारण छत्तीसगढ़ में सबसे अच्छे पारिस्थितिक पर्यटन स्थलों में से एक माना जाता है।

तीरथगढ़ जलप्रपात : तीरथगढ़ जलप्रपात को “मिल्की फॉल” के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि जब पानी चट्टानी ढलान से नीचे गिरता है, जिससे ऐसा लगता है जैसे दूध गिर रहा है। यह कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में जगदलपुर से लगभग 38 किमी दूर है, जो पारिस्थितिक पर्यटन के लिए एक लोकप्रिय स्थान है। छत्तीसगढ़ के सबसे खूबसूरत झरनों में से एक तीरथगढ़ फॉल्स है, जो घूमने के लिए एक खूबसूरत जगह है। पानी लगभग 100 फीट से अधिक की ऊंचाई से गिरता हुआ शानदार दृश्य पेश करता है। झरने के आसपास के क्षेत्र में हरे भरे जंगल हैं जो झरने को और भी खूबसूरत बनाते हैं।

चित्रकोट कैसे जाये

  • विमान: यदि आप हवाई मार्ग से इस स्थान की यात्रा करना चाहते हैं, तो निकटतम हवाई अड्डा रायपुर में स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (RPR) है। यह दिल्ली, पुणे, बैंगलोर और मुंबई सहित अधिकांश प्रमुख और आसपास के शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लगभग 342 किलोमीटर है।
  • सड़क : छत्तीसगढ़ में सड़क संपर्क काफी मापनीय है। एक सड़क यात्रा, विशेष रूप से आपके अपने वाहन में, आपको कुछ अविस्मरणीय क्षण बनाने की अनुमति देती है। सड़क मार्ग से जगदलपुर और अन्य शहरों (बस्तर) के बीच नियमित बस सेवाएं, एक्सप्रेस और स्लीपर दोनों चलती हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग 30 जैसे राष्ट्रीय राजमार्गों के एक अच्छी तरह से जुड़े नेटवर्क के लिए वे दैनिक आधार पर परिचालन कर रहे हैं।
  • ट्रेन : अगर आप छत्तीसगढ़ में चित्रकूट जलप्रपात देखना चाहते हैं तो रायपुर के लिए ट्रेन से जा सकते हैं। लोकमान्यतिलक विशाखापत्तनम जंक्शन सुपरफास्ट एक्सप्रेस, गीतांजलि एक्सप्रेस, रायगढ़ गोंडवाना एक्सप्रेस और अन्य जैसी कई ट्रेनें इस मार्ग से यात्रा करती हैं और आपको रायपुर के रेलहेड तक ले जा सकती हैं। इसके आगे आप अपनी सुविधा से जा सकते हैं।

इन्हें भी देखें

चित्रकोट झरने देखने जाने से पहले अक्सर पूछे जाने वाले सवाल जवाब

चित्रकोट झरना कहाँ है?

चित्रकोट जलप्रपात भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर ज़िले में इन्द्रावती नदी पर स्थित एक सुंदर जलप्रपात है। इस जल प्रपात की ऊँचाई 90 फीट है।

चित्रकोट जलप्रपात कौन सी नदी में है?

चित्रकोट जलप्रपात इन्दिरा नदी पर है। छ.ग. के बस्तर जिला से होकर बहती है।

भारत का नियाग्रा जलप्रपात कौन सा है?

चित्रकोट वॉटरफॉल को भारत का नियाग्रा कहते है।